हरिद्वार पूर्ण कुम्भ महापर्व २०१० - आमंत्रण

११ फरवरी २०१० (गुरुवार माघ कृष्ण १३ सं. २०६६) से १५ अप्रैल २०१० (वैशाख कृष्ण अमावस्या २०६७) तक
गंगा नगरी महातीर्थ हरिद्वार में पूर्ण कुम्भ का अमृत योग मेष राशि में सूर्य और कुम्भ राशि में गुरु आने पर गंगा तट पर आयोजित होता है ।
कुम्भ महापर्व भारत ही नहीं विश्व का सबसे महानतम् मानवीय समागम है । इस अवसर पर भारत ही नहीं विश्वभर के महानतम संत, विचारक, दार्शनिक, समाजसेवी एवं सभी वर्गों के शीर्ष पुरुष एकत्र होकर दार्शनिक, आध्यात्मिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक, राजनैतिक एवं अन्य मानवीय परोप्रेक्ष्यों में राष्ट्र एवं विश्व के कल्याण का चिंतन करते है तथा संत, सद्गुरु जन मनुष्य होने का अर्थ और परम सत्य की प्राप्ति, आत्म साक्षात्कार या भगवत प्राप्ति रूप मनुष्य के परम लक्ष्य की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करते है । इस अवसर पर पतित पावनी भगवती गंगा में स्नान एवं गंगा तट के सिद्ध सानिध्य के साथ-साथ योगाभ्यास, प्राणायाम, ध्यान-साधना, स्वाध्याय, श्रीमद् भगवद् गीता सत्संग आदि के सहित समग्र वेद-वेदान्त तत्त्वबोध एवं पूर्ण गुरुकृपा की प्राप्ति होकर जीवन धन्य हो जाया है ।
आपको यह जानकर प्रसन्नता होगी कि इस अवसर पर अपने भक्तों एवं जिज्ञासुओं के कल्याण को ध्यान में रखकर श्री अखण्ड गीता पीठ शाश्वत सेवाश्रम ट्रस्ट कुरुक्षेत्र की ओर से ट्रस्ट के संस्थापक एवं परमाध्यक्ष तथा पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी के श्री श्री १००८ श्री महामण्डलेश्वर डॉ. स्वामी शाश्वतानन्द गिरि जी महाराज की अध्यक्षता संतो के सानिध्य में विशाल सत्संग सेवा शिबिर का आयोजन किया जायेगा ।
इस अवसर पर ६६ दिवस पर्यन्त योगाभ्यास, ध्यान साधना, सम्पूर्ण श्री मद् भगवद् गीता ज्ञान यज्ञ, १०८ श्री मद् भगवद् परायण सहित श्री मद् भागवत सप्ताह कथा, १०८ रामचरितमानस परायण, चंडी यज्ञ, भंडारा, अन्नवेत (लंगर), संत सेवा, अतिथि सेवा, समष्टि भंडारा एवं अन्यान्य सेवा कार्यक्रम होंगे ।
सभी सुधी साधक भक्त एवं श्रद्धालु शिष्य जन इस शुभ अवसर पर आमंत्रित है । अवश्य जीवन लाभ प्राप्त करें ।
जब तक जिन्दगी रहेगी फुरसत न होगी काम से ।
कुछ समय तो निकालो प्रेम कर लो राम से ॥

