ध्यान देने योग्य बातें

  • धन की केवल तीन गतियाँ हो सकती है - भोग, नाश और दान
  • मनुष्य की केवल दो गतियाँ हो सकती है - मोक्ष (भगवत्प्राप्ति) या पुनर्जन्म
  • मोक्ष (भगवत्प्राप्ति) आत्म-साक्षात्कार या समग्र समर्पण या भगवत-शरणागति सें होता है तब तो आपको सब कुछ भगवान का ही है, आपको दान की प्रेरणा की आवश्यकता नहीं है।
  • यदि आप अभी जीवन मुक्त नहीं है तो कर्म ही आपके भावी और वर्तमान जीवन का निर्धारण करते है।
  • शास्त्र कहते हैं पाप-पुण्य समान होने से साधारन मनुष्य योनि मिलती है, पाप अधिक होने से अधोगति यानि कूकर, शूकर आदि की योनि मिलती है, पुण्य अधिक होने से श्रेष्ठ मनुष्य योनि मिलती है।
  • दूसरे को कष्ठ देना पाप है। केवल अपने लिये जीना न पाप है न पुण्य है। दूसरों की सेवा करना, दूसरों के लीये जीना पुण्य है। इसलिये वर्तमान में भी जो एसा करते हैं इनको आनन्द कैसा मिलता है पता है। जो ऐसा नहीं करते वे बेचारे हैं। आप स्वयं मोहन भोग खायें इसका कोई पुण्य नहीं जो भूखे को सूखी रोटी खिला भी दे तो क्या है कितना पुण्य है। आप स्वयं समझ सकते हैं बल्कि भगवान श्री कृष्ण तो और कहते हैं - "भुञ्जते ते त्वधं पापाये पचन्त्यात्मकारणात्‍" अर्थात्‍ जो केवल अपने लिये भोजन पकाते हैं वह पाप ही खाते हैं। आप गीता की इस वाणी पर विचार करें।
  • कुम्भ मेला ज्ञानार्जन, पुण्यार्जन, समर्पण एवं सेवा का ही मेला है। यहाँ आपके पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित है क्योंकि यहाँ सबको भोजन चाहिये इसीलिये अन्य कार्यक्रमों के साथ हमारा अन्नक्षेत्र (संतो एवं सभी के लिये भोजन सेवा) विशेष है। आप अवश्य अपनी सेवायें दे सकते हैं।
  • एक संत को माह की भिक्षा ₨ 501/-
  • एक दिन का छोटा भण्डारा ₨ 21001/-
  • बड़ा पक्का भण्डारा ₨ 50001/-
  • प्रातः संतो का स्वल्पाहार ₨ 21001/-
 
महाकुम्भ हरिद्वार के अमृतयोग में सेवा हेतु अन्य अपेक्षित वस्तुयें।
 
भाग्यशाली दानी सज्जन इन पर विचार कर सकते हैं। संतो की रोज सभी मंडलियाँ आती हैं जिनको भोजन के साथ अन्य दैनिक उपयोगी वस्तुयें भी दान की जाती है वह इस प्रकार हो सकती है - (१) श्री मद्‍ भगवद्‍ गीता गुटका (२) रामायण गुटका (३) हनुमान चालीसा (४) सुन्दरकांड (५) रुद्राक्ष माला (६) स्टील का कमण्डल (७) बनयान (८) आचला, चद्दर (९) शाल (१०) कम्बल (११) गिलास (१२) छाता (१३) स्वेटर (१४) टोपा (१५) चप्पल (१६) मंजन (१७) साबुन
 
सभी मंडलियों में कुम्भ संतो की संख्या पाँच हजार (5000) होती है। अतः इन वस्तुओं की संख्या भी इतनी ही होनी चाहिये। परन्तु जितना जो कर सके कर सकता है। या कुछ लोग मिलकर कोई वस्तु बटवा सकते हैं। स्वयं वहाँ खड़े होकर भी बाट सकते है।
 
अन्य वस्तुयें - (१) थालियाँ 11000 (२) गिलास 11000 (३) चम्मच 11000 (४) कम्बल 1100 (५) "श्री कृष्णः शरणम्‍" छपे हुये शाल 1100 (७) केटली (८) बाल्टी 125 (९) मग 125 (१०) दरी 125 (११) वाटर दिटर 125 (१२) गैस चूल्हे - बड़े (१३) रोटी सेंकने वाले वड़े चूल्हे। ये भी जो जितना करे कर सकता है। भोजन सामग्री- आटा, दाल, चावल, चीनी, घी, तेल, पोहा आदि।