अष्तोत्तरशत (१०८) श्री मद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ
दिनांकः ७ अप्रैल २०१० से १४ अप्रैल २०१० तक
स्थानः पंचायती अखाड़ा श्रीनिरंजनी का मेला परिसर
व्यास पीठासीन परमाध्यक्षः विश्वविश्रुत श्री श्री १००८ अखण्ड पीठाधीश्वर महामण्डलेशवर डॉ. स्वामी शाश्वतानन्द गिरि जी महाराज (विद्यावाचस्पति, पी.एच.डी)
प्रियात्मन्
श्री मद् भागवत के महत्व से सभी परिचित है। जो आपलो इस लोक में सभी प्रकार की सिद्धि समृद्धि देकर आपके ह्रदय को भक्ति-भाव सें आप्लावित कर देती है और अन्तःकरण शुद्धिपूर्वक आप जीते-जी भगवत्प्राप्ति कर लेते है, मुक्त हो जाते है। साथ ही श्री मद् भागवत की यह अपनी जी विशेषता है कि वह आपके पितरों किसी भी दिवंगत आत्मा को भी मुक्ति लाभ देती है। पं. पूं. महाराज जी जो इस कुम्भ में स्वयं श्री मद् भागवत प्रवचन करेंगे। उनकी कई प्रत्यक्ष घटनायें भारत में है जहाँ पितरों की मुक्ति एवं पितर दोष का निवारण हुआ। कुम्भ पर्व फिर महा तीर्थ हरिद्वार का गंगातट वहाँ पर भागवत का कितना महत्व होगा आप विचार कर सकते है। वहाँ १०८ भागवत परायण होना है। १०८ यजमान उसका लाभ उठा सकेंगे। प्रत्येक यजनाम का अपना आचार्य होगा और पूरा अनुष्ठान उनका अपना होगा। प्रवचन पं. पू. महाराज जी करेंगे। इस प्रकार आपकी पूर्ण भागवत कराने का पुण्य लाभ प्राप्त होगा। जो लोग इच्छुक हो शीग्रता सें फार्म भरकर अपना नाम लिख दें। गोत्र जरूर लोखें संकल्प लेने में वह अनिवार्य होता है। जिनकी स्मृति में करवाना हो उनका नाम लिखे चित्र भी भेजें।
इस पूरे अनुष्ठान में एवं यजमान को इक्कीस हजार की सहयोग राशि देनी होगी। राशि देकर रसीद अवश्य प्राप्त करें।
विशेष -
- पूरे कार्यक्रम की वीडियों सीडी आपको निःशुल्क दी जायेगी। आप बाद में भी अपने आचार्य अपना अनुष्ठान एवं भागवत प्रवचन देख सकेंगे।
- भागवत के यजमानों की भागवत काल में आवास एवं भोजन की भी व्यवस्था रहेगी उन्हें अलग से कुछ नहीं देना होगा, लेकिन ववस्था उचित ढंग से सम्मिलित ही होगी। एक टेंट या कमरा लेना हो तो अलग से सम्पर्क करें।
- आपके उपस्थित न रहने पर भी आपकी भागवत हो जायेगी।

