शिवोऽहम् श्री कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् सोऽहम्
Deepavali Ke Ashish
दीपावली मानते हो तो पहले मन के दीप जलाओ ॥
जला जला मिट्टी के दीपक धरती का मत हृदय जलाओ ॥
जिस दिन मन के दीप जलेंगे न होगा दीपक तले अँधेरा ॥
मन को मन के मीत मिलेंगे कोई होगा नहीं अकेला ॥
यह दीवाली का भाव पक्ष है जानो तत्त्व दृष्टि की ज्योति ॥
देखो दीपक अलग अलग हैं लेकिन उनमे सबमे एक ज्योति ॥
ऐसे ही सब के देह अलग हैं लेकिन उन सब में एक साक्षी ॥
तुम वही सर्व व्यापी चेतन हो शिवोङहम् स्वयं प्रकाश आत्मा ॥
सभी को इस प्रकाश पर्व की शुभ मंगल भावनाएं ॥
सभी स्वस्थ हों प्रगति शील हों सुख समृद्धि को पायें ॥
अपने सहज स्वरुप में रह कर जग व्योहार निभाएं ॥
सुखी रहें सब को सुख बांटें यह आर्शीवाद हमारा ॥
॥ शिवोङहम् ॥
महामंडलेश्वर डॉक्टर स्वामी शाश्वतानंद गिरी जी महाराज
अखंड गीता पीठ कुरुक्षेत्र
हरियाणा भारत

